सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विवादित मस्जिद को शनिवार तड़के प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई जिला जज की अदालत द्वारा शुक्रवार, 4 सितंबर को मस्जिद कमेटी की अपील खारिज किए जाने के बाद की गई। कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा तथा एहतियातन परिसर के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। प्रशासन का आरोप था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर धार्मिक ढांचा बनाया गया और परिसर का कुछ हिस्सा किराये पर भी दिया जा रहा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई 2026 को मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। साथ ही करीब 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी।
315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे का आरोप
प्रशासन के अनुसार विवादित जमीन खसरा संख्या 539 में आती है और राजस्व अभिलेखों में इसे कचहरी/कलेक्ट्रेट भूमि के रूप में दर्ज बताया गया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने करीब 315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे को अनधिकृत माना था। प्रशासन का कहना था कि कब्जा लंबे समय से चला आ रहा था, जिसके आधार पर क्षतिपूर्ति की गणना की गई।
मस्जिद कमेटी ने 1911 के बिजली बिल का दिया हवाला
दूसरी ओर मस्जिद कमेटी ने प्रशासन के दावे का विरोध किया था। कमेटी की ओर से पुराने दस्तावेजों के साथ 1911 का बिजली बिल पेश किए जाने की बात सामने आई थी। मस्जिद पक्ष का दावा था कि इससे पता चलता है कि यहां धार्मिक स्थल काफी पुराना है और जमीन के मालिकाना हक को लेकर प्रशासन का दावा सही नहीं है। हालांकि, अदालत ने सरकारी राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कब्जे को अनधिकृत माना।
पहले मिली थी राहत, फिर अपील खारिज
मस्जिद कमेटी ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। जुलाई में जिला एवं सत्र न्यायालय से ध्वस्तीकरण और अर्थदंड की वसूली पर अंतरिम रोक की खबर सामने आई थी। बाद में मामले की सुनवाई और दोनों पक्षों के साक्ष्यों पर विचार के बाद 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज कर नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा, जिसके अगले ही दिन प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।
इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा
कार्रवाई से पहले कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया। उन्होंने कहा कि वह कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मिलने सहारनपुर जाना चाहती थीं।
वहीं प्रशासन का कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई। सहारनपुर के डीआईजी ने भी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है।





