Fighterjikahin संवाददाता कमलेश फाइटर
अयोध्या । राम की नगरी अयोध्या में आज समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुंचे। उनका मुख्य कार्यक्रम सपा नेता और अयोध्या विधानसभा सीट से घोषित पार्टी प्रत्याशी तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के कृष्णापुर स्थित आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होना था। कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने कथा सुनी और संतों का आशीर्वाद लिया।
अखिलेश का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। समाजवादी पार्टी ने अयोध्या विधानसभा सीट से पवन पांडेय को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
लेकिन कथा के मंच से अखिलेश यादव ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे दी। अखिलेश ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को अपने दावों और अयोध्या में अपनी पकड़ पर इतना भरोसा है, तो वह खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी को अयोध्या से प्रत्याशी नहीं मिल रहा और पार्टी सर्वे करा रही है। ये दावे अखिलेश यादव के हैं, जिन्हें स्वतंत्र चुनावी सर्वे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने भागवत कथा के संदर्भ में सत्ता, जाति, ऊंच-नीच और छुआछूत से ऊपर उठने की बात कही। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए प्रेम, इंसानियत और सामाजिक न्याय को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने प्रशासन और सत्ता के रवैये पर भी सवाल उठाए।
अब बात उस मुद्दे की, जिस पर अयोध्या में अखिलेश के दौरे से पहले ही चर्चा थी—रामलला के दर्शन। पहले जारी कार्यक्रम में राम मंदिर दर्शन का उल्लेख नहीं था। आज की उपलब्ध रिपोर्टों में भी उनके मुख्य कार्यक्रम के तौर पर पवन पांडेय के यहां भागवत कथा में शामिल होने की पुष्टि है। कुछ रिपोर्टों में नवंबर में राम मंदिर और हनुमानगढ़ी दर्शन के संभावित कार्यक्रम का उल्लेख किया गया था, लेकिन उसे भविष्य की योजना के तौर पर ही बताया गया है।
वहीं बीजेपी नेताओं ने अखिलेश के अयोध्या दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अयोध्या आने पर उन्हें रामलला के दर्शन करने चाहिए थे। दूसरी ओर, पूर्व बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी अखिलेश से रामलला के दर्शन और सरयू के दर्शन की अपील की।
यानी आज अयोध्या में अखिलेश यादव का दौरा धार्मिक कार्यक्रम से शुरू हुआ, लेकिन मंच से निकला योगी को चुनाव लड़ने का चैलेंज इसे सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या बीजेपी की ओर से इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया आती है और 2027 के चुनाव से पहले अयोध्या की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।





