कानपुर नगर।
समस्त सिख संप्रदायों में से केवल नामधारी संप्रदाय ही है, जो अपने वर्तमान मुखी सतिगुरू ठाकुर दलीप सिंघ जी के आदेश अनुसार जन्माष्टमी और रामनवमी को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। नामधारियों द्वारा हिंदू-सिख एकता के लिए किया जा रहा यह विलक्षण कार्य अपने आप में एक इतिहास है।

गुरुवाणी में भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी को ‘सतिगुरू’ लिखा गया है। गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग 1390 पर सतिगुरू नानक देव जी को कलियुग का अवतार बताते हुए, भगवान कृष्ण चंद्र जी को द्वापर का अवतार लिखा गया है। इस लिए भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी और सतिगुरू नानक देव जी को एक ही ज्योति माना जाता है।
ठाकुर दलीप सिंघ जी वचन करते हैं कि भगवान कृष्ण जी ने कभी भी यह नहीं कहा कि “मैं हिंदू हूँ” या केवल हिंदुओं का ही हूँ। इसी प्रकार सतिगुरू नानक देव जी ने भी कभी नहीं कहा कि “मैं सिख हूँ” या केवल सिखों का ही हूँ। हिंदू और सिख हम सगे भाई हैं। हम अलग नहीं हो सकते।
ठाकुर दलीप सिंघ जी के अनुसार, “हिन्दुओं का वास्तविक नाम ‘सनातन’ है। हिंदू नाम तो विदेशियों ने दिया था। और सिख शब्द भारतीय भाषा के ‘शिष्य’ शब्द से बना है।”
केश-रहित भी सिख हो सकते हैं। बहुत से केश-रहित भाई, हम केशधारी सिखों से कहीं अधिक श्रद्धालु हैं। केवल केश, दाढ़ी या बाहरी पहनावा ही सिख की वास्तविक पहचान नहीं है। सिखी बाहरी स्वरूप से नहीं; सिखी तो श्रद्धा से है।
ब्रह्मज्ञानी भाई घनैया जी, गुरु के महान प्रेमी भाई नंद लाल जी, छोटे साहिबजादों को चोरी से दूध पिलाने वाले मोती राम मेहरा जी, साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए मोहरें बिछा कर जमीन खरीदने वाले दीवान टोडरमल जी आदि सिख, दसवें पातशाह जी के समय भी “अमृतधारी” नहीं थे; परंतु वह भी महान सिख थे।
दसवें गुरु जी ने कभी भी केश-रहित भाइयों को “ये सिख नहीं हैं” कह कर, पंथ में से नहीं निकाला। और गुरु ग्रंथ साहिब जी में भी कहीं नहीं लिखा कि “केवल केशधारी ही सिख हो सकते हैं और केश-रहित सिख नहीं हो सकते।”
आप सभी सतिगुरू नानक देव जी पर श्रद्धा रखते हैं। इस लिए आप हमारे केश-रहित सिख भाई हैं। आज हम नामधारी, अपने सतिगुरू ठाकुर दलीप सिंघ जी के आदेश अनुसार, अपने केश-रहित सिख भाइयों के साथ मिल कर कृष्ण जन्माष्टमी मना रहे हैं।
बाल रास लीला ने मोहा मन

इस मौके पर स्लम के बच्चों द्वारा बहुत सुंदर बाल रास लीला द्वारा सभी को मंत्रमुग्ध कर नाचने पर मजबूर कर दिया। सुदामा नाट्य, मटकी फोड़, डांडिया नृत्य आदि कर समागम को आनंदित बना दिया।

गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस समागम में पनकी धाम के महंत कृष्णदास जी, शिव शक्ति अखाड़ा के प्रमुख मधुराम जी, सिद्धनाथ मंदिर के महंत अरुण चैतन्य पुरी जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्री राम जी, दादा नगर कोपोस्टेट के चेयरमैन विजय कपूर जी, भवानी भीख जी, ओपीएफ के एडमिन ऑफिसर ब्रजेंद्र सिंह जी, अवध बिहारी, कुंज बिहारी, गौरांग जी, विश्व हिन्दू परिषद के उमेश पालीवाल, बजरंग दल के संयोजक प्रकाश शर्मा, अमरनाथ जी, पार्षद दल के नेता नवीन पंडित, पार्षद सरोज चड्ढा, नीरज चड्ढा, मंडल उपाध्यक्ष राजिंदर सिंह ज़िन्दी आदि अनेको गणमान्य उपस्थित हुए।
इस हिन्दू-सिख एकता को समर्पित जन्माष्टमी समारोह पर निशुल्क शिक्षा केन्द्र पर उपकारी सेवा समिति के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। तत्पश्चात खीर व मिष्ठान वितरित किया गया।












